रायपुर नगर निगम के वित्तीय स्त्रोंतो का अध्ययन
नीलाम्बर पटेल1, डाॅ. डी. एन. वर्मा2
1शोधार्थी, अर्थशास्त्र अध्ययनशाला, पं.रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर (छ.ग.)।
2 प्राचार्य, शास. नागार्जुन विज्ञान महाविद्यालय रायपुर, (छ.ग.)
’ब्वततमेचवदकपदह ।नजीवत म्.उंपसरू दपसनचंजमस2906/हउंपसण्बवउए कदअंतउं/हउंण्बवउ
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प्रस्तुत शोध पत्रमें रायपुर नगर निगम के वित्तीय स्त्रोतों का अध्ययन किया गया है। रायपुर नगर निगम की कुल आय-व्यय के प्रमुख स्त्रोतों में हुई परिवर्तन का अध्ययन करने के लिये वर्ष 2001-02 से वर्ष 2014-15 तक की समयावधि का चयन किया गया है। निगम की कुल आय-व्यय एवं उनके प्रमुख स्त्रोतो मेंहुई परिवर्तन का विश्लेषण संयुक्त वार्षिक वृद्दि दर ;ब्।ळत्द्धए विचरण गुणांक ;ब्टद्धए माध्य ;डमंदद्धए प्रमाप विचलन ;ैक्द्धआदि विधियों की सहायता से किया गया है।अध्ययन से ज्ञात हुआ कि राजस्व आय की अपेक्षा अन्य आय में संयुक्त वार्षिक वृध्दि दर अधिक देखने को मिली है। राजस्व आय के प्रमुख स्त्रोतों में सर्वाधिक संयुक्त वार्षिक वृध्दि दर विविध क्षेत्र की तथा सबसे कम संयुक्त वार्षिक वृध्दि दर अन्य स्वच्छता प्रभार से प्राप्त होने वाली आय में रही। अर्थात् सारणी के आकलन से स्पष्ट होता है विगत कई वर्षो से अन्य स्वच्छता प्रभार से आय प्राप्त नही होने के कारण इसमें संयुक्त वार्षिक वृध्दि दर ऋणात्मक रही। निगम की अन्य आय के स्त्रोतों में सर्वाधिक संयुक्त वार्षिक वृध्दि दर 23.13 पँूजंीगत आय के स्त्रोतों में देखने को मिली तथा सबसे कम वृध्दि की दर सस्पेंस खाता में -14.07 रही।निगम की कुल व्यय में संयुक्त वार्षिक वृध्दि दर 17.99 प्रतिशत रही। व्यय की मदों में सर्वाधिक संयुक्त वार्षिक वृध्दि दर नगरीय नियोजन एवं भवन अनुज्ञा विभाग, गरीबी एवं सामाजिक कल्याण विभाग, अनु. जाति एवं जनजाति कल्याण विभाग, पूंजीगत व्यय व जोन व्यय क्रमशः 40.20 प्रतिशत, 31.88 प्रतिशत, 30.56 प्रतिशत, 26.03 प्रतिशत एवं 25.89 प्रतिशत रही तथा सबसे कम संयुक्त वार्षिक वृध्दि दर महिला एवं बाल विकास विभाग, लोक कर्म विभाग, पर्यावरण एवं उद्यानिकी विभाग तथा शिक्षा खेलकुद एवं युवा कल्याण आदि विभागों की क्रमशः -17.18 प्रतिशत, -1.23 प्रतिशत, 3.44 प्रतिशत एवं 9.54 प्रतिशत रही है।
ज्ञम्ल्ॅव्त्क्ैरू नगरीय निकाय, वित्तीय स्त्रोत, कुल आय-व्यय, राजस्व आय, पँूजंीगत आय।
प्रस्तावना:-
किसी भी संगठन अथवा प्रशासन की सफलता और असफलता उसकी वित्तीय स्थिति पर निर्भर करती है। कमजोर वित्तीय स्थिति प्रशासन को अपंग बना देती हैं तथा इसके विपरीत सुदृढ़ वित्तीय स्थ्तिि प्रशासन को उसकी कार्यो और दायित्वों का निर्वहन करने में सहायता प्रदान करती हैं। इस सम्बन्ध में महान दार्शनिक कौटिल्य ने कहा है- ‘‘प्रशासन के सभी उपक्रम वित्त पर निर्भर होते है अतः प्रशासन को सर्वप्रथम अपने राजकोष के भुगतान पर ध्यान केन्द्रित करना चाहिऐ।’’1 वास्तव में वित्त किसी भी प्रशासन अथवा संगठन की रीड़ की हड्डी होती हंै जो कि प्रशासन अथवा संगठन को विकास मार्ग पर अग्रसर करने ईधन प्रदान करती है। सामान्यतः वित्त से आशय राजस्व से लगाया जाता है। राजस्व के अन्र्तगत नागरिकांे तथा नागरिकों का प्रतिनिधित्व करने वाली प्रशासनिक ईकाइयों की आय-व्यय एवं उनके मध्य समायोजन को शामिल किया जाता है। इस सम्बन्ध में लुट्ज ने कहाॅ है कि- ’’राजस्व के अन्र्तगत उन साधनो की व्यवस्था, वितरण, एवं समायोजन को शामिल किया जाता है जिनकी आवश्यकता प्रशासन अथवा संगठन के कार्यो एवं दायित्वों के संचालन हेतु आवश्यक होती है।‘‘2 इसलिये सार्थक वित्तीय स्थिति किसी भी प्रशासन के लिये विशेष महत्वपूर्ण होती है।
आधुनीकीकरण के साथ नागरिकों की आवश्कताऐं बढ़ती जा रही है जिसके कारण केन्द्र, राज्य एवं स्थानीय सरकार के कार्य एवं दायित्व भी दिन प्रतिदिन बढ़ते जा रहे है। केन्द्र, राज्य एवं स्थानीय सरकार के कार्य और दायित्व को सुचारू रूप से संचालित करने तथा पर्याप्त मात्रा में संसाधनों को उपलब्ध कराने के लिये वित्त की आवश्यकता होती है। औद्योगिकीकरण और शहरीकरण के कारण शहरी जनसंख्या दिनों दिन बढ़ती जा रही है। चूंकि बदलते परिवेश तथा कार्य क्षेत्र अधिक होने के कारण स्थानीय समस्याओं और आवश्यकताओं की सही जानकारी केन्द्र एवं राज्य सरकार को प्राप्त नहीं हों पाता और कार्यो का निर्वहन विलम्ब से होता है। देश में शहरी स्थानीय निकायो के समक्ष स्थानीय समस्याओं के समाधान एवं आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु वित्त की उपलब्धता एक गम्भीर समस्या बनी हुई है। हालाकि शहरी स्थानीय निकायों को सेवाओं के विस्तार एवं गुणवत्ता में सूधार में लिये केन्द्र एवं राज्य सरकार द्वारा सहायता अनुदान प्रदान किया जाता है। अतः स्थानीय नागरिकों की आवश्यकताओं को पुरा करने संविधान में नगरीय निकायों को विभिन्न मदों से आय प्राप्त करने तथा उसे विभिन्न मदों पर व्यय करने का अधिकार प्रदान किया गया है। ताकि शहरी स्थानीय निकाय स्वतंत्रतापूर्वक अपनी आय में बढ़ा सके और स्थानीय लोगो कोे गुणवत्तायुक्त मूलभूत सेवाओं को उपलब्ध करा सके। इस शोध पत्र में रायपुर नगर निगम की वित्तीय स्त्रोंतो का अध्ययन करने का प्रयाश किया गया है।
अध्ययन के उद्देश्य:-
प्रस्तुत शोध अध्ययन रायपुर नगर निगम वित्तीय स्त्रोतों का अध्ययन करने के लिये कुछ उद्देश्य निर्धारित किया गया है जो कि निम्नानुसार हैं।-
1. रायपुर नगर निगम के वित्तीय स्त्रोतों का अध्ययन करना।
2. रायपुर नगर निगम आय-व्यय में हुई परिवर्तन का अध्ययन करना।
3. अध्ययन केे निष्कर्षों के आधार पर सुझाव प्रस्तुत करना।
शोध प्रविधि:-
इस शोध अध्ययन हेतु रायपुर नगर निगम का चयन किया गया है। द्वितीयक आकड़ो की सहायता से किया गया है। द्वितीयक आकड़ों का संकलन नगर निगम रायपुर, नगरीय प्रशासन विभाग, केन्द्रिय संाख्यिकी संगठन, राष्ट्रीय नमुना सर्वेक्षण, आर्थिक सर्वेक्षण छत्तीसगढ़, छत्तीसगढ़, आर्थिक संाख्यिकी संचनालय, विभिन्न शासकीय एवं अर्धशासकीय प्रकासन एवं पत्रिकाओं की सहायता से कि गई है। अध्ययन में रायपुर नगर निगम की कुल आय-कुल व्यय एवं इनके प्रमुख स्त्रोतों में हुई परिवर्तन का अध्ययन करने के लिये प्रतिशत विधि का प्रयोग किया गया है साथ ही संयुक्त वार्षिक वृध्दि दर ;ब्वउचवनदक ।ददनंस ळतवूजी त्ंजमद्धए विचरण गुणांक ;ब्वमििपबपमदज व िटंतपंजपवदद्धए माध्य ;डम्।छद्ध एवं प्रमाप विचलन ;ैजंदकंतक क्मअपंजवदद्ध ज्ञात किया गया है। संयुक्त वार्षिक वृध्दि दर ;ब्।ळत्द्धए विचरण गुणांक ;ब्टद्धए माध्य ;डम्।छद्ध एवं प्रमाप विचलन ;ैक्द्ध ज्ञात करने के लिये एमएस एक्सेल एवं एसपीएसएस का प्रयोग किया गया है।
1. संयुक्त वार्षिक वृध्दि दर ;ब्।ळत्द्ध
जहाँए
। त्र वास्तविक मुल्य या अन्तिम मुल्य ;।बजनंस टंसनमद्ध
च्त्र प्रारम्भिक या पिछला मूल्य ;च्तमअपवने अंसनमद्ध
त्त्रसंयुक्त वार्षिक वृध्दि दर ;ब्वउचवनदक ।ददनंस ळतवूजी त्ंजमद्ध
छ त्र समयावधि ;छनउइमत व िज्पउम च्मतपवकद्ध
2. विचरण गुणांक ;ब्टद्ध
जहाँए
ण गुणांक ;ब्वमििपबपमदज व िटंतपंजपवदद्ध
प्रमाप विचलन ;ैजंदकंतक कमअपंजपवदद्ध
माध्य ;डमंदद्ध
नगरीय निकायों की आय के प्रमुख स्त्रोत
प्रस्तुत शोध अध्ययन में रायपुर नगर निगम को विभिन्न स्त्रोतों से प्राप्त होने वाली कुल आय तथा कुल आय में राजस्व आय के स्त्रोत एवं अन्य आय के स्त्रोतों से प्राप्त होने वाली कुल आय को सम्मिलित किया गया है। रायपुर नगर निगम के कुल आय तथा कुल आय के विभिन्न स्त्रोतों का अध्ययन करने के लिये वित्तीय वर्ष 2001-02 से 2014-15 तक कुल 14 वर्षो का चयन किया गया है।
उपरोक्त सारणी में रायपुर नगर निगम की कुल आय के स्त्रोतों को प्रदर्शित किया गया है। अध्ययन से ज्ञात हुआ कि अध्ययन अवधि में कुल आय की स्त्रोतों में राजस्व आय का अनुपात अन्य आय की अपेक्षा अधिकांश वर्षोे में अधिक रही हैं। कुछ वर्षों में राजस्व आय के अनुपात में कमी अनुदान एवं अंशदान में कमी होने के कारण हुई है। अर्थात् यह कहा जा सकता है कि रायपुर नगर निगम को आत्मनिर्भर होने के लिये स्वयं की स्त्रोतों से आय एकत्र करने में असमर्थ है। अध्ययन अवधि में निगम की राजस्व आय में सर्वाधिक योगदान अनुदान व अंशदान एवं कर व दर की रही तथा स्वचछता प्रभार से प्राप्त होने वाले आय का योगदान सबसे कम रही। अन्य आय के स्त्रोतों में पूंजीगत आय का योगदान सर्वाधिक रही तथा सबसे कम सस्पेन्स खाता की रही। सारणी में रायपुर नगर निगम (वित्तीय वर्ष 2001-02 से 2014-15 तक) की कुल आय एवं आय के प्रमुख स्त्रोतों में हुई परिवर्तन का अध्ययन करने के लिये संयुक्त वार्षिक वृध्दि दर ज्ञात किया गया है। सारणी के अध्ययन से ज्ञात हुआ कि रायपुर नगर निगम की कुल आय में संयुक्त वार्षिक वृध्दि दर 17.95 प्रतिशत रही जिसमें राजस्व आय व अन्य आय की वृध्दि दर क्रमशः 14.78 प्रतिशत व 21.71 प्रतिशत रही अर्थात् वर्ष 2001-02 से 2014-15 की अध्ययन अवधि में राजस्व आय की अपेक्षा अन्य आय में संयुक्त वार्षिक वृध्दि दर अधिक देखने को मिली है। राजस्व आय के प्रमुख स्त्रोतों में सर्वाधिक संयुक्त वार्षिक वृध्दि दर विविध क्षेत्र की 20.30 प्रतिशत रही तथा सबसे कम अन्य स्वच्छता प्रभार से प्राप्त होने वाली आय की -8.76 प्रतिशत रही अर्थात् सारणी के आकलन से स्पष्ट होता है कि रायपुर नगर निगम को विगत कई वर्षो से अन्य स्वच्छता प्रभार से आय प्राप्त नही होने के कारण इसमें वृध्दि की दर ऋणात्मक रही। निगम की अन्य आय के स्त्रोतों में सर्वाधिक संयुक्त वार्षिक वृध्दि दर 23.13 पँूजंीगत आय के स्त्रोतों में देखने को मिली तथा सबसे कम वृध्दि की दर सस्पेंस खाता में -14.07 रही।
नगरीय निकायों की व्यय के प्रमुख स्त्रोत
प्रस्तुत शोध पत्र में रायपुर नगर निगम के विभिन्न विभागों द्वारा किये गये कुल व्यय के अध्ययन के लिये वित्तीय वर्ष 2003-04 से 2014-15 तक कुल 12 वर्षों का चयन किया गया है। रायपुर नगर निगम के विभिन्न विभागों द्वारा किये गये कुल व्यय को सारणी 04 में प्रदर्शित किया गया है। सारणी क्रमांक 2के अध्ययन से ज्ञात होता है कि अध्ययन अवधि में रायपुर नगर निगम की कुल व्यय में सर्वाधिक अनुपात क्रमश: पूंजीगत व्यय, वित्त, लेखा एवं अकंेक्षण विभाग, लोक कर्म विभाग, जल कार्य विभाग, खाद्य, लोक स्वास्थ्य एवं स्वच्छता विभाग, अग्निशमन, विद्युत एवं यांत्रिकी विभाग, जोन व्यय एपं डिपाजिट वक्र्स आदि की रही। तथा महिला एवं बाल विकास विभाग, गरीबी एवं सामाजिक कल्याण विभाग, अनु. जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग,सस्पेसं खाता, राजस्व विभाग, संस्कृति, पर्यटन, मनोरंजन एवं विरासत संरक्षण विभाग तथा शिक्षा खेलकदू एवं युवा कल्याण आदि विभागों का आनुपात कुल व्यय में बहुत कम रही। अर्थात रायपुर गनर निगम समाज की मूलभूत आवश्यकताओं एवं प्रमुख समस्याओं पर बहुत कम अनुपात में व्यय कर रही है। अतः नगरीय निकाय को इन क्षेत्रों में व्यय को बढ़ाने की आवश्यकता है।
सारणी क्रमांक 2में रायपुर नगर निगम (वित्तीय वर्ष 2003-04 से 2014-15 तक) की कुल व्यय एवं व्यय के प्रमुख स्त्रोतों में हुई परिवर्तन का अध्ययन करने के लिये संयुक्त वार्षिक वृध्दि दर ज्ञात किया गया है। निगम की कुल व्यय में संयुक्त वार्षिक वृध्दि दर 17.99 प्रतिशत रही। निगम की व्यय की मदों में सर्वाधिक वृध्दि दर नगरीय नियोजन एवं भवन अनुज्ञा विभाग, गरीबी एवं सामाजिक कल्याण विभाग, अनु. जाति एवं जनजाति कल्याण विभाग, पूंजीगत व्यय व जोन व्यय क्रमशः 40.20 प्रतिशत, 31.88 प्रतिशत, 30.56 प्रतिशत, 26.03 प्रतिशत एवं 25.89 प्रतिशत रही। तथा निगम की व्यय की मदों में सबसे कम वृध्दि की दर महिला एवं बाल विकास विभाग, लोक कर्म विभाग, पर्यावरण एवं उद्यानिकी विभाग तथा शिक्षा खेलकुद एवं युवा कल्याण आदि विभागों की क्रमशः -17.18 प्रतिशत, -1.23 प्रतिशत, 3.44 प्रतिशत एवं 9.54 प्रतिशत रही। निगम द्वारा वित्त लेखा एवं अकंेक्षण विभाग, सामान्य प्रशासन एवं विधायी कार्य विभाग, जल कार्य विभाग, राजस्व विभाग, खाद्य लोक स्वास्थ्य एवं स्वच्छता विभाग, अग्निशमन, विद्युत एवं यांत्रिकी विभाग, संस्कृति, पर्यटन, मनोरंजन एवं विरासत संरक्षण विभाग, डिपाजिट वक्र्स, सस्पेसं खाता आदि विभागों में किया गया व्यय अन्य विभागों में किया गया व्ययों की वृध्दि दर की अपेक्षा सामान्य रही।
स्त्रोत - रायपुर नगर निगम वार्षिक बजट पुस्तिका नोट:- कोष्टक में दी गई जानकारी प्रतिशत को प्रदर्षित कर रही है।
सारणी क्रमांक 3एवं रेखाचित्र में निगम की वित्तीय वर्ष 2001-02 से 2014-15 तक की प्रारम्भिक शेष, कुल आय, कुल व्यय तथा अन्तिम शेष की वास्तविक स्थिति को प्रदर्शित किया गया है। सारणी के आकलन से ज्ञात होता है कि रायपुर नगर निगम की कुल आय, कुल व्यय, प्रारम्भिक शेष तथा अन्तिम शेष में सयुक्त वार्षिक वृध्दि दर ;ब्।ळत्द्ध क्रमशः 17.95 प्रतिशत, 17.99 प्रतिशत, 25.35 प्रतिशत एवं 25.52 प्रतिशत रही। सारणी के विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि वर्ष 2001-02 से 2014-15 तक रायपुर नगर निगम की कुल आय और कुल व्यय की सयुक्त वार्षिक वृध्दि दर में लगभग समानता देखने को मिली किन्तु प्रारम्भिक शेष और अन्तिम शेष इन अवधियों में सयुक्त वार्षिक वृध्दि दर कुल आय और कुल व्यय की अपेक्षा में अधिक रही है। वर्ष 2001-02 से 2014-15 तक रायपुर नगर निगम की कुल आय, कुल व्यय, प्रारम्भिक शेष तथा अन्तिम शेष का विचरण गुणंक क्रमशः 67.74 प्रतिशत, 64.65 प्रतिशत, 89.31 प्रतिशत व 80.84 प्रतिशत रही है। सारणी के अध्ययन से स्पष्ट होता है कि रायपुर नगर निगम की कुल आय, कुल व्यय, प्रारम्भिक शेष और अन्तिम शेष में अधिक अस्थिरता पायी गयी है। परन्तु यह अस्थिरता कुल व्यय की अपेक्षा कुल आय में अधिक रही तथा अन्तिम शेष की अस्थिरता प्रारम्भिक शेष की अपेक्षा कम रही है।
निष्कर्ष
ग्रामीण एवं शहरी स्थानीय निकाय प्रत्यक्ष रूप से स्थानीय नागरिकों को मूलभूत बुनियादीसुविधााऐं (जलापूर्ति, साफ-सफाई, सड़क प्रकास व्यवस्था आदि) प्रदान कर नागरिकों के कल्याण मेंवृद्धि करती है। वर्तमान में बढ़ती हुई जनसंख्या एवं औद्यौगीकरण के कारण शहरी आबादी दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। जनगणना वर्ष 1951 में देश की शहरी जनसंख्या कुल जनसंख्या का17.30 था जो कि जनगणना वर्ष 2001 एवं 2011 में बढ़कर क्रमशः 27.81 एवं 31.20 प्रतिशत हो गई है। बढ़ती हुई शहरी आबादी को मूलभूत बुनियादी सुविधाऐं(जलापूर्ति, साफ-सफाई, सड़क प्रकाश व्यवस्था आदि) उपलब्ध कराने वित्त की कमी स्थानीयनगरीय निकायों के लिये एक गम्भीर समस्यां बनी हुई है। सारणी क्रमांक 01 से अध्ययन से ज्ञात हुआ किकुल आय में विविध, अनुदान एवं अंशदान से प्राप्त होने वाली आय का अनुपात स्वयं की स्रोतों से प्राप्त आयसे अधिक है अर्थात रायपुर नगर निगम स्वयं की स्त्रोतों से पर्याप्त आय एकत्र करने में अशमर्थ है। निगम को आत्मनिर्भर बनने तथा करों से प्राप्त होने वाली आय का पूर्ण क्षमता के साथ संग्रहण करने के लियेे स्थानीय नागरिकों को उनके दायित्व एवं कर्तव्यों के प्रति जागरूक करने की आवश्यकता है। दुसरी ओर सारणी क्रमांक 02 के अध्ययन से यह ज्ञात होता है कि रायपुर नगर निगम के व्यय की प्रमुख मदों में संयुक्त वार्षिक वृध्दि दर महिला एवं बाल विकास विभाग, लोक कर्म विभाग, पर्यावरण एवं उद्यानिकी विभाग तथा शिक्षा खेलकुद एवं युवा कल्याण आदि विभागों की क्रमशः -17.18 प्रतिशत, -1.23 प्रतिशत, 3.44 प्रतिशत एवं 9.54 प्रतिशत रही है जो कि वर्तमान की प्रमुख समस्याओं में शामिल है। सारणी क्रमांक 03 के अध्ययन से ज्ञात हुआ कि निगम की कुल आय एवं कुल व्यय में वृध्दि तो हो रही है किन्तु प्रारम्भिक शेष तथा अन्तिम शेष की अपेक्षा कम वृध्दि हो रही है अर्थात् नगरीय निकाय प्राप्त आय का पूर्ण उपयोग करने में असमर्थ है। अतः निगम को प्राप्त आय का पूर्ण उपयोग करने के लिये उचित नीतियों एवं योजनाओं का क्रियान्वयन कर निम्न व्यय होने वाली विभागों में (महिला एवं बाल विकास विभाग, लोक कर्म विभाग, पर्यावरण एवं उद्यानिकी विभाग तथा शिक्षा खेलकुद एवं युवा कल्याण आदि) व्यय को बढ़ाना चाहिये।
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Received on 29.12.2018 Modified on 19.01.2019
Accepted on 24.02.2019 © A&V Publications All right reserved
Int. J. Rev. and Res. Social Sci. 2019; 7(1):231-238.